शंकराचार्य जी की पत्रकार वार्ता सनातन के विरोधी को सत्ता में नहीं रहना चाहिए
शंकराचार्य जी की पत्रकार वार्ता सनातन के विरोधी को सत्ता में नहीं रहना चाहिए
हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और
हम न्याय की प्रतीक्षा करेंगे
बन्धुओ!!
आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं। प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, लेकिन आज यहाँ से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी।
प्रयाग में जो कुछ भी घटित हुआ, उसने न केवल हमारी आत्मा को झकझोरा है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। संगम की इन लहरों में स्नान करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संतृप्ति का मार्ग है; परंतु आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए, इस संकल्प को अधूरा छोड़कर यहाँ से विदा ले रहे हैं। जब हृदय में क्षोभ और ग्लानि का ज्वार हो, तो जल की शीतलता भी अर्थहीन हो जाती है।
हम प्रेस के अपने बन्धुओं के माध्यम से समाज और प्रशासन तक यह बात पहुँचाना चाहते हैं कि न्याय की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती।
आज हम यहाँ से जा रहे हैं, और अपने पीछे केवल सत्य की गूँज और उन अनुत्तरित प्रश्नों को छोड़कर जा रहे हैं जो प्रयाग की इस हवा में हमेशा विद्यमान रहेंगे।
अब बस कुछ क्षण की शांति और एकांत की आवश्यकता है, ताकि इस पीड़ा को आत्मसात किया जा सके।
जिन लोगों ने हमारी पीडा को अनुभव किया और साथ आये उन सबको साधुवाद।
आप सभी का भी धन्यवाद।"
स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
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